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देश भर में बने मौसमी सिस्टम

PALLAVI...
Posted : Thu/Jul 22, 2021, 05:18 AM - IST

दिल्ली / बारिश का मौसम सुरु हो गया है और अभी बारिश ने सभी तरफ हड़तं मजा दी है। सभी तरफ बारिश आ रही है। कहि कहि सड़को पर गाड़िया दुब रही है, तो कहि घर। मॉनसून ट्रफ अब अमृतसर, करनाल, अलीगढ़, सुल्तानपुर, जमशेदपुर से होते हुए उत्तर पश्चिम बंगाल के ऊपर कम दबाव के क्षेत्र और फिर पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़...

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By  Public Reporter
posted : Wed/Jul 21, 2021, 01:35 AM - IST

Amravati Division / सोसोखेड़ा गांव... / धारणी/ आज 19 जुलाई 2021 को अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम 2006 नियम 2008 संशोधन नियम 2012 के तहत सोसोखेड़ा गांव को वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1) के तहत सामूहिक वन अधिकार मिला है. सामूहिक वन अधिकार (सीएफआर)। हालांकि, उनके तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण, ऐसा पहले नहीं किया गया है। जून 2020 से, सामाजिक प्रगति सहयोग (एसपीएस) के अनुरूप सामूहिक वन अधिकारों का प्रबंधन करने का निर्णय लिया गया। इसने सूक्ष्म नियोजन योजना तैयार कर इसके क्रियान्वयन की शुरुआत की और प्रथम वर्ष में सीएफआर क्षेत्र में रोजगार गारंटी योजना के तहत 75 हेक्टेयर क्षेत्र में डीसीटी कार्य किया गया। इसमें से 6000 मानव दिवस सृजित किए गए। इसके लाभों को ध्यान में रखते हुए यदि वे क्षेत्र में बांस, कस्टर्ड सेब, गुड़, आंवला के पेड़ लगाते हैं, तो यह अगले चार-पांच वर्षों में फल देना शुरू कर देगा और यह लाभदायक होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा ने कठिन परिश्रम से वृक्षारोपण करने का निर्णय लिया। गांव में 101 परिवार हैं और प्रत्येक परिवार ने 50 गड्ढे खोदकर पेड़ लगाने और उनका पालन-पोषण करने का फैसला किया।5000 गड्ढे खोदे गए। इसलिए आज वृक्षारोपण उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन माननीय डॉ. श्री वैभव वाघमारे सर (सहा. जिल्हाधिकारी तथा उपविभागीय अधिकारी धारणी) यह मुख्य अतिथि थे तथा  मा.श्री अतुल पटोळे (तहसीलदार धारणी), मा. श्री महेश पाटील सर (उच्च श्रेणी) गटविकास अधिकारी पंचायत समिती धारणी, श्री. रामलाल काळे (ग्रामसभा पयविहिर), श्री. धनंजय साय्यारे (निसर्ग फाउंडेशन धारणी) सौ. रुमकाबाई कासदेकर (सरपंच ग्रा.पं जांभु ),श्री. गरिब्या शनवारे (उपसरपंच  ग्रा.पं जांभु), श्री. धर्मेंद्र गेहलोत, (समाज प्रगती सहयोग), श्री. संदीप घुसाळे(प्रकल्प समन्वयक, प्रकल्प कार्यालय धारणी), श्री. जितेंद्र मोहोड (तालुका वन हक्क समन्वयक धारणी) ओर श्री नितीन कांबळे (सोसोखेडा बिट वनरक्षक ) श्री. के. बी. तायडे (वनपाल), श्री. नारायण आठोले, (PTO) तर ओर SPS के दिपेश, विक्की, स्वामी, अमोल व टीम तसेच टाटा ट्रस्ट चे समन्वयक संगीता मॅडम, सुनील सर व सामुहिक वन हक्क समितीचे अध्यक्ष नारायण मावस्कर, उपाध्यक्ष राधा बेठेकर तर सचिव कृष्णा खडके, कुंजीलाला सावलकर, श्री. सोनाजी सावलकर, श्री. मानाजी सवालकर, श्री. संतुलाल बेठेकर, श्री. बिसराम सवालकर, श्री. साभुलाल मावस्कार और अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति के दौरान ली गई तस्वीरें।



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By  Public Reporter
posted : Tue/Jun 29, 2021, 06:48 AM - IST

Wardha / पर्यावरण संरक्षण को... / वर्धा/पर्यावरण के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है| यहां हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा करता है | ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण सृजन का उत्तम साधन है | पर्यावरण के संरक्षण के लिए वन विभाग के सहयोग की आवश्यकता है |  कोरोना का हाल में शहरों से लौटे मजदूरों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है, उन्हें पौधारोपण  के काम से जोड़ने की आवश्यकता है | कोरोना काल में शहर से लौटे मजदूरों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है, उन्हें पौधारोपण के काम से जोड़ने की जरूरत है, देश में 2 प्रतिशत भूमि पर ही वन है, यह बहुत कम है, इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए  | वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण करना चाहिए | साथी पेड़ों की कटाई को रोकने की जरूरत है | वन के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती | इसके लिए ग्रीन जोन बनाने की आवश्यकता है | ग्रीन जोन बनाने से पर्यावरण को काफी लाभ होगा |



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By  Public Reporter
posted : Sat/May 22, 2021, 09:38 AM - IST

उत्तराखंड में अतीस,... / अल्मोड़ा/ जैव विविधता के लिए मशहूर उत्तराखंड में अतीस, वन ककड़ी, कुटकी, वन हल्दी, थुनेर, मीठा विष, जटामासी समेत कई दुर्लभ वनस्पतियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। अनियंत्रित दोहन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। वैश्वीकरण ने जिस तरह उत्तराखंड की जैव विविधता को नुकसान पहुंचाया है, यदि यह नहीं रुका तो भविष्य में इसके भयानक दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  71 फीसदी वन भूभाग वाला उत्तराखंड जैव विविधता के लिए मशहूर है। यहां अतीस, वन ककड़ी, गंदरैणी, कुटकी, वन हल्दी, थुनेर, मीठा विष, जटामासी समेत कई दुर्लभ किस्म की वनस्पतियां बहुतायत में मौजूद हैं, जिनका किसी न किसी रूप में औषधीय महत्व है। लंबे समय से बड़े पैमाने पर इन वनस्पतियों का अनियंत्रित दोहन हो रहा है। इस कारण इन वनस्पतियों के अस्तित्व पर संकट का साया मंडरा रहा है। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल अल्मोड़ा के जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट के अनुसार वन ककड़ी, गदरैणी, कुटकी, थुनेर, अतीस, मीठा विष, वन हल्दी समेत अन्य कई वनस्पतियों का बड़े पैमाने पर हो रहा अनियंत्रित दोहन यह  चिंताजनक है। इससे जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे बचेगी जैव विविधता पिछले कुछ सालों में इन वनस्पतियों के अनियंत्रित दोहन में बड़ी तेजी आई है। इस कारण उत्तराखंड में यह वनस्पतियां कम होते जा रही हैं। दोहन पर रोक नहीं लगाई तो भविष्य में यह विलुप्ति के कगार पर पहुंच जाएंगी। उन्होंने कहा कि जैव विविधता को पहुंच रहे नुकसान के कारण जंगलों में जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। उन्हें जंगलों में खाने को कुछ नहीं मिल रहा है। इस कारण जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। दुर्लभ वनस्पतियों की ऐसी प्रजातियों को बचाने और संवर्धन करने का काम वन प्रभागों के जरिये हो सकता है। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल अल्मोड़ा के जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट ने कहा कि जैव विविधता को बचाने के लिए स्कूलों में हर्बल गार्डन बनाए जाने चाहिए। साथ ही किसानों को औषधीय उत्पादों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। जंगलों में अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ ही वन संरक्षण में लोगों की सहभागिता बढ़ानी होगी। जंगलों में फलदार पौधे लगाने को प्राथमिकता देनी होगी। जानवरों को जंगलों में ही भोजन मिल जाएगा तो वह आबादी की ओर भी नहीं आएंगे। सबसे अहम बात यह है कि ‘जैव विविधता संरक्षण शिक्षा’ को बढ़ावा देना होगा। इसे स्कूली पाठ्यक्रमों में लागू किया जाना चाहिए ताकि बच्चे भी अपने खास भूगोल के बारे में जान सके।



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By  Public Reporter
posted : Wed/May 19, 2021, 09:09 AM - IST

Mumbai / ताउते तूफान चला... / मुंबई/ अरब सागर में उठा ताउते तूफान मुंबई में कुछ दूर से होकर गुजर गया लेकिन भयंकर तबाही का मंजर छोड़ गया। मुंबई, ठाणे और पालघर में चक्रवाती तूफान से 11 लोगों की मौत हो गई। वहीं, तूफान के चलते भारी नुकसान हुआ है जिसका आंकलन किया जा रहा है। ताउते तूफान से मुंबई में बीते 24 घंटे में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हो गए। वहीं, पड़ोसी जिले ठाणे और पालघर में चक्रवात से अलग-अलग घटनों में 5 लोगों के मौत की खबर है। इसमें एक 51 वर्षीय ऑटोचालक भी शामिल है। ताउते तूफान की वजह से अरब सागर में ऊंची लहरें उठी थी। जिसके कारण चौपाटी, मरीन ड्राईव और गेट वे ऑफ इंडिया पर कई टन कचरा जमा हो गया। इस तूफान की वजह से कई ऊंची और ऐतिहासिक इमारतें और जगह भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से बताया गया है कि माहिम और मढ़ जेट्टी के पास दो नौक दुर्घटनाग्रस्त होने से दो लोगों की मौत हो गई है। वहीं, वरली में एक झुग्गी बस्ती पर पेड़ गिरने से एक महिला की मृत्यु हो गई। मुंबई में दीवार गिरने से नौ लोग घायल हुए जबकि एक व्यक्ति पेड़ गिरने से बुरी तरह जख्मी हो गया। मुंबई से सटे पालघर के वसई-विरार और ग्रामीण इलाकों में भी बिजली चली गई। कुछ स्थानों पर मंगलवार को शाम चार बजे तक बिजली की आपूर्ति बहाल हो गई जबकि कई इलाकों में अब भी अंधेरा छाया हुआ है। मुंबई में मई में 24 घंटे में अब तक की रिकॉर्ड बारिश चक्रवाती तूफान ताउते के कारण मुंबई में 230 मिलीमीटर बारिश हुई है। पुणे स्थित भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान में उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों को लेकर शोध करने वाले विनीत कुमार ने मंगलवार को ट्वीट किया, मुंबई सांताक्रूज चक्रवात के प्रभाव के कारण पिछले 24 घंटों में 230 मिमी बारिश हुई, यह दर्ज इतिहास में मुंबई में मई में 24 घंटे में हुई सबसे अधिक बारिश है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई केंद्र के अनुसार, सांताक्रूज वेधशाला ने मंगलवार सुबह 8.30 बजे समाप्त हुई 24 घंटे की अवधि में 230.3 मिमी बारिश दर्ज की।  इसके अलावा, कोलाबा वेधशाला ने इसी अवधि के दौरान 207.6 मिमी बारिश दर्ज की। आईएमडी की गणना के अनुसार, 204.5 मिमी से अधिक वर्षा को अत्यधिक भारी वर्षा माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि कुल 135 ‘हाई टेंशन वायर’ के खंभे, 418 ‘लोकल ट्रांसमिशन’ के खंभे और आठ ‘ट्रांसफार्मर’ क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य के ऊर्जामंत्री नितिन राऊत ने कहा है कि विद्युत आपूर्ति बहाल करने केलिए 13,172 कर्मचारी युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। रायगढ़ की जिलधिकारी निधि चौधरी ने सभी तहसीलदारों को चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है।



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By  Public Reporter
posted : Tue/May 18, 2021, 06:33 AM - IST

मेडागास्कर तट पर... / अफ्रीकी देश मेडागास्‍कर के तट पर शार्क का शिकार करने वाले शिकारियों ने 42 करोड़ साल पुरानी मछली को पकड़ा है। यह मछली coelacanth प्रजाति की है और डायनासोर के समय में पाई जाती थी। मछली के 8 पंख हैं। यही नहीं इस मछली के विशाल शरीर पर विशेष धारियां भी बनी हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका जर्नल ऑफ साइंस के एक शोध में कहा गया है कि शार्क के शिकार की वजह से Coelacanth मछल‍ियों के अस्तित्‍व पर खतरा मंडराने लगा है। शार्क म‍छलियों का शिकार वर्ष 1980 के दशक से तेज हो गया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि शार्क को पकड़ने के लिए शिकारियों के जिलनेट बहुत खतरनाक खोज है। ये इतने विशाल हैं कि गहरे समुद्र में भी शार्क को फंसा लेते हैं। शोधकर्ताओं ने को अब डर सता रहा है कि मेडागास्‍कर में शिकारी जिलनेट से इस अद्भुत मछली का शिकार बढ़ सकता है। उन्‍होंने कहा कि मेडागास्‍कर में कोई संरक्षण उपाय नहीं किए जाने के बाद भी बड़ी संख्‍या में यह मछली यहां पर मौजूद है। शोध में कहा गया है कि मेडागास्‍कर विभ‍िन्‍न coelacanth प्रजातियों के लिए केंद्र बन गया है। हालांकि वहां की सरकार इस शिकार को रोकने के लिए बहुत ज्‍यादा चिंतित नहीं दिखाई दे रही है।



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By  Public Reporter
posted : Mon/May 17, 2021, 08:17 AM - IST

Ahmedabad / आज शाम गुजरात के तट... / अहमदाबाद/ ताउते’ के तूफान से अत्यंत तीव्र चक्रवाती तूफान में तब्दील होने के बाद अब सोमवार के शाम गुजरात पहुंचने का अनुमान है और रात आठ बजे से 11 बजे के बीच राज्य के तटीय इलाकों से होता हुआ यह आगे बढ़ जाएगा। एहतियात के तौर पर राज्य प्रशासन ने 17 जिलों के तटीय इलाकों से एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और सोमवार सुबह फिर बचाव कार्य शुरू किया। राज्य आपात सेवा केंद्र के अनुसार सोमवार सुबह छह बजे तक 24 घंटे में गुजरात के 21 जिलों के 84 तालुका में चक्रवाती विक्षोभ के कारण हल्की बारिश भी हुई है। छह तालुका में करीब एक इंच से अधिक बारिश हुई। भारत मौसम विभाग के  अनुसार, तूफान ताउते अत्यंत तीव्र चक्रवाती तूफान में बदल गया है। आईएमडी ने कहा कि इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और 17 मई की शाम को गुजरात तट पर पहुंचने और 17 मई की रात आठ से 11 बजे के बीचपोरबंदर और महुवा भावनगर जिला के बीच गुजरात तट को पार करने का अनुमान है। इस दौरान 155 से 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने का अनुमान है। मंगलवार तक समुद्र की स्थिति  असाधारण रहेगी और इसके बाद इसमें सुधार आएगा। राज्य सरकार ने बताया कि 17 जिलों के 655 संवेदनशील गांवों से एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित अस्थायी आश्रयों में ठहराया गया है। उसके अनुसार, चक्रवात के कारण किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वन, सड़क एवं आवास, स्वास्थ्य, राजस्व तथा बिजली सहित कई विभागों के दलों को तैनात किया गया है।



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By  Public Reporter
posted : Thu/Apr 08, 2021, 11:18 AM - IST

New Delhi / दिल्ली का मौसम: अब... / दिल्ली/ अगले तीन दिन तक राजधानी का मौसम लोगो को गर्मी से आंशिक राहत देगा। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में कमी रहेगीं।तीन दिनों बाद पारा 40 डिग्री तक पहूंचेगा।अगले 24 घंटो में बादल छाए रहने के साथ तेज हवा चलने की संभवना है। मौसम विभाग के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव के अनुसार 11 तारीख के बाद तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। पारा 40 के पर पहुंचते ही लू चलने की संभावना भी बढ़ती है हाल ही में पश्चिमी विक्षोभ होकर गुजरा है। इसका अधिक असर पहाड़ी इलाको में है। पहाड़ी दिशाओं से आणि वाली ठंडी हवाएं  और नमी का स्तर अधिक होने की वजह से आने वाले तीन दिन तक दिल्ली का तापमान कम रहेगा। इसके बाद तपती गर्मी के साथ लू का भी सामना करना  पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अप्रैल के अंत तक दिल्ली का पारा चढ़ने के साथ लू का दौर सुरु होता है। इस बार गर्मी ज़्यादा होने के कारण लू भी जल्दी दस्तक देगी। खराब श्रेणी में रही हवा,दिल्ली का एक्यूआई 250 दिल्ली-एनसीआर की हवा बुधवार को खराब श्रेणी में रही। इनमे गाज़ियाबाद में हालत सबसे खराब रहे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बुधवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक एक्यूआई 250 दर्ज हुआ है।गाज़ियाबाद में यह 275 और ग्रेटर नोएडा में 274 रहा है। हवा की दिशा उत्तर-पूर्वी बन रही है। अगले दीन में हवा की गुणवत्ता बदलेगी। पिछले 24 घंटे में हवा में पीएम10 290 और पीएम2.5 91 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। 



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Jan 01, 1970, 05:30 AM - IST

Delhi / चार धाम हाईवे... / नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चार धाम नेशनल हार्ईवे प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र को आदेश दिया है कि वह वन क्षेत्र को हुए नुकसान की भरपाई के लिए पौधरोपण कराए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरएफ नरीमन, नवीन सिन्हा और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने मंगलवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 2018 में जारी सर्कुलर के दिशा-निर्देशों का पालन करे। इससे पहले केंद्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा चीन की सीमा से जुड़े क्षेत्र में है। इस मार्ग पर सेना से जुड़े वाहनों की आवाजाही भी रहेगी। इसलिए सड़क की चौड़ाई 5 मीटर की जगह 7 मीटर करने की अनुमति दी जाए। जस्टिस रोहिंग्टन ने इसकी अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि 2018 के सर्कुलर के मुताबिक ही सड़क बनाई जाए। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि प्रोजेक्ट में अभी तक 25 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। चार धाम हाईवे प्रोजेक्ट में तहत 900 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है। इसमें 400 किमी सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। हाईपावर कमेटी ने दो रिपोर्ट दी, सुप्रीम कोर्ट ने अध्यक्ष सहित चार सदस्यों की रिपोर्ट को मंजूर किया। चार धाम प्रोजेक्ट के लिए गठित 26 सदस्यीय हाई पावर कमेटी सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे पर दो टीमों में बंट गई थी और दो अलग-अलग रिपोर्ट दी। दिसंबर 2016 में शुरू हुए प्रोजेक्ट के लिए दो लेन रोड बनाना तय हुआ, लेकिन 2018 में सड़क परिवहन मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर पहाड़ों पर इंटरमीडिएट रोड यानी 5.5 मीटर और दोनों तरफ एक-एक मीटर के फुटपाथ के साथ 7.5 मीटर रोड बनाने का नियम बना दिया। कमेटी के अध्यक्ष सहित चार सदस्य इंटरमीडिएट रोड के पक्ष में थे। इससे 80-90% पर्यावरणीय नुकसान बचेगा। वहीं कमेटी के अधिकांश सदस्य दो लेन हाईवे के पक्ष में 12 मीटर चौड़ी रोड की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के प्रमुख प्रो. रवि चोपड़ा, डॉ. हेमंत ध्यानी, डॉ नवीन जुआल, डॉ एस. सत्य कुमार की रिपोर्ट को ही मंजूर किया। डॉ. हेमंत ध्यानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक फैसला दिया है। हालांकि गंगा आह्वान संस्था से जुड़ी मल्लिका भनोट ने कहा कि चार धाम प्रोजेक्ट के नाम पर जो हुआ है, उससे पर्यावरणीय नुकसान हुआ और भूस्खलन की घटनाओं में लोगों की जान गई। इसके लिए किसी को तो जिम्मेदार ठहराया जाना ही चाहिए।                               



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Jan 01, 1970, 05:30 AM - IST

Delhi / चार धाम हाईवे... / नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चार धाम नेशनल हार्ईवे प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र को आदेश दिया है कि वह वन क्षेत्र को हुए नुकसान की भरपाई के लिए पौधरोपण कराए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरएफ नरीमन, नवीन सिन्हा और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने मंगलवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 2018 में जारी सर्कुलर के दिशा-निर्देशों का पालन करे। इससे पहले केंद्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा चीन की सीमा से जुड़े क्षेत्र में है। इस मार्ग पर सेना से जुड़े वाहनों की आवाजाही भी रहेगी। इसलिए सड़क की चौड़ाई 5 मीटर की जगह 7 मीटर करने की अनुमति दी जाए। जस्टिस रोहिंग्टन ने इसकी अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि 2018 के सर्कुलर के मुताबिक ही सड़क बनाई जाए। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि प्रोजेक्ट में अभी तक 25 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। चार धाम हाईवे प्रोजेक्ट में तहत 900 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है। इसमें 400 किमी सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। हाईपावर कमेटी ने दो रिपोर्ट दी, सुप्रीम कोर्ट ने अध्यक्ष सहित चार सदस्यों की रिपोर्ट को मंजूर किया। चार धाम प्रोजेक्ट के लिए गठित 26 सदस्यीय हाई पावर कमेटी सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे पर दो टीमों में बंट गई थी और दो अलग-अलग रिपोर्ट दी। दिसंबर 2016 में शुरू हुए प्रोजेक्ट के लिए दो लेन रोड बनाना तय हुआ, लेकिन 2018 में सड़क परिवहन मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर पहाड़ों पर इंटरमीडिएट रोड यानी 5.5 मीटर और दोनों तरफ एक-एक मीटर के फुटपाथ के साथ 7.5 मीटर रोड बनाने का नियम बना दिया। कमेटी के अध्यक्ष सहित चार सदस्य इंटरमीडिएट रोड के पक्ष में थे। इससे 80-90% पर्यावरणीय नुकसान बचेगा। वहीं कमेटी के अधिकांश सदस्य दो लेन हाईवे के पक्ष में 12 मीटर चौड़ी रोड की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के प्रमुख प्रो. रवि चोपड़ा, डॉ. हेमंत ध्यानी, डॉ नवीन जुआल, डॉ एस. सत्य कुमार की रिपोर्ट को ही मंजूर किया। डॉ. हेमंत ध्यानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक फैसला दिया है। हालांकि गंगा आह्वान संस्था से जुड़ी मल्लिका भनोट ने कहा कि चार धाम प्रोजेक्ट के नाम पर जो हुआ है, उससे पर्यावरणीय नुकसान हुआ और भूस्खलन की घटनाओं में लोगों की जान गई। इसके लिए किसी को तो जिम्मेदार ठहराया जाना ही चाहिए।                               



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By  Public Reporter
posted : Thu/Apr 08, 2021, 11:18 AM - IST

New Delhi / दिल्ली का मौसम: अब... / दिल्ली/ अगले तीन दिन तक राजधानी का मौसम लोगो को गर्मी से आंशिक राहत देगा। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में कमी रहेगीं।तीन दिनों बाद पारा 40 डिग्री तक पहूंचेगा।अगले 24 घंटो में बादल छाए रहने के साथ तेज हवा चलने की संभवना है। मौसम विभाग के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव के अनुसार 11 तारीख के बाद तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। पारा 40 के पर पहुंचते ही लू चलने की संभावना भी बढ़ती है हाल ही में पश्चिमी विक्षोभ होकर गुजरा है। इसका अधिक असर पहाड़ी इलाको में है। पहाड़ी दिशाओं से आणि वाली ठंडी हवाएं  और नमी का स्तर अधिक होने की वजह से आने वाले तीन दिन तक दिल्ली का तापमान कम रहेगा। इसके बाद तपती गर्मी के साथ लू का भी सामना करना  पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अप्रैल के अंत तक दिल्ली का पारा चढ़ने के साथ लू का दौर सुरु होता है। इस बार गर्मी ज़्यादा होने के कारण लू भी जल्दी दस्तक देगी। खराब श्रेणी में रही हवा,दिल्ली का एक्यूआई 250 दिल्ली-एनसीआर की हवा बुधवार को खराब श्रेणी में रही। इनमे गाज़ियाबाद में हालत सबसे खराब रहे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बुधवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक एक्यूआई 250 दर्ज हुआ है।गाज़ियाबाद में यह 275 और ग्रेटर नोएडा में 274 रहा है। हवा की दिशा उत्तर-पूर्वी बन रही है। अगले दीन में हवा की गुणवत्ता बदलेगी। पिछले 24 घंटे में हवा में पीएम10 290 और पीएम2.5 91 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। 



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By  Public Reporter
posted : Mon/May 17, 2021, 08:17 AM - IST

Ahmedabad / आज शाम गुजरात के तट... / अहमदाबाद/ ताउते’ के तूफान से अत्यंत तीव्र चक्रवाती तूफान में तब्दील होने के बाद अब सोमवार के शाम गुजरात पहुंचने का अनुमान है और रात आठ बजे से 11 बजे के बीच राज्य के तटीय इलाकों से होता हुआ यह आगे बढ़ जाएगा। एहतियात के तौर पर राज्य प्रशासन ने 17 जिलों के तटीय इलाकों से एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और सोमवार सुबह फिर बचाव कार्य शुरू किया। राज्य आपात सेवा केंद्र के अनुसार सोमवार सुबह छह बजे तक 24 घंटे में गुजरात के 21 जिलों के 84 तालुका में चक्रवाती विक्षोभ के कारण हल्की बारिश भी हुई है। छह तालुका में करीब एक इंच से अधिक बारिश हुई। भारत मौसम विभाग के  अनुसार, तूफान ताउते अत्यंत तीव्र चक्रवाती तूफान में बदल गया है। आईएमडी ने कहा कि इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और 17 मई की शाम को गुजरात तट पर पहुंचने और 17 मई की रात आठ से 11 बजे के बीचपोरबंदर और महुवा भावनगर जिला के बीच गुजरात तट को पार करने का अनुमान है। इस दौरान 155 से 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने का अनुमान है। मंगलवार तक समुद्र की स्थिति  असाधारण रहेगी और इसके बाद इसमें सुधार आएगा। राज्य सरकार ने बताया कि 17 जिलों के 655 संवेदनशील गांवों से एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित अस्थायी आश्रयों में ठहराया गया है। उसके अनुसार, चक्रवात के कारण किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वन, सड़क एवं आवास, स्वास्थ्य, राजस्व तथा बिजली सहित कई विभागों के दलों को तैनात किया गया है।



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By  Public Reporter
posted : Tue/May 18, 2021, 06:33 AM - IST

मेडागास्कर तट पर... / अफ्रीकी देश मेडागास्‍कर के तट पर शार्क का शिकार करने वाले शिकारियों ने 42 करोड़ साल पुरानी मछली को पकड़ा है। यह मछली coelacanth प्रजाति की है और डायनासोर के समय में पाई जाती थी। मछली के 8 पंख हैं। यही नहीं इस मछली के विशाल शरीर पर विशेष धारियां भी बनी हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका जर्नल ऑफ साइंस के एक शोध में कहा गया है कि शार्क के शिकार की वजह से Coelacanth मछल‍ियों के अस्तित्‍व पर खतरा मंडराने लगा है। शार्क म‍छलियों का शिकार वर्ष 1980 के दशक से तेज हो गया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि शार्क को पकड़ने के लिए शिकारियों के जिलनेट बहुत खतरनाक खोज है। ये इतने विशाल हैं कि गहरे समुद्र में भी शार्क को फंसा लेते हैं। शोधकर्ताओं ने को अब डर सता रहा है कि मेडागास्‍कर में शिकारी जिलनेट से इस अद्भुत मछली का शिकार बढ़ सकता है। उन्‍होंने कहा कि मेडागास्‍कर में कोई संरक्षण उपाय नहीं किए जाने के बाद भी बड़ी संख्‍या में यह मछली यहां पर मौजूद है। शोध में कहा गया है कि मेडागास्‍कर विभ‍िन्‍न coelacanth प्रजातियों के लिए केंद्र बन गया है। हालांकि वहां की सरकार इस शिकार को रोकने के लिए बहुत ज्‍यादा चिंतित नहीं दिखाई दे रही है।



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posted : Wed/May 19, 2021, 09:09 AM - IST

Mumbai / ताउते तूफान चला... / मुंबई/ अरब सागर में उठा ताउते तूफान मुंबई में कुछ दूर से होकर गुजर गया लेकिन भयंकर तबाही का मंजर छोड़ गया। मुंबई, ठाणे और पालघर में चक्रवाती तूफान से 11 लोगों की मौत हो गई। वहीं, तूफान के चलते भारी नुकसान हुआ है जिसका आंकलन किया जा रहा है। ताउते तूफान से मुंबई में बीते 24 घंटे में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हो गए। वहीं, पड़ोसी जिले ठाणे और पालघर में चक्रवात से अलग-अलग घटनों में 5 लोगों के मौत की खबर है। इसमें एक 51 वर्षीय ऑटोचालक भी शामिल है। ताउते तूफान की वजह से अरब सागर में ऊंची लहरें उठी थी। जिसके कारण चौपाटी, मरीन ड्राईव और गेट वे ऑफ इंडिया पर कई टन कचरा जमा हो गया। इस तूफान की वजह से कई ऊंची और ऐतिहासिक इमारतें और जगह भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से बताया गया है कि माहिम और मढ़ जेट्टी के पास दो नौक दुर्घटनाग्रस्त होने से दो लोगों की मौत हो गई है। वहीं, वरली में एक झुग्गी बस्ती पर पेड़ गिरने से एक महिला की मृत्यु हो गई। मुंबई में दीवार गिरने से नौ लोग घायल हुए जबकि एक व्यक्ति पेड़ गिरने से बुरी तरह जख्मी हो गया। मुंबई से सटे पालघर के वसई-विरार और ग्रामीण इलाकों में भी बिजली चली गई। कुछ स्थानों पर मंगलवार को शाम चार बजे तक बिजली की आपूर्ति बहाल हो गई जबकि कई इलाकों में अब भी अंधेरा छाया हुआ है। मुंबई में मई में 24 घंटे में अब तक की रिकॉर्ड बारिश चक्रवाती तूफान ताउते के कारण मुंबई में 230 मिलीमीटर बारिश हुई है। पुणे स्थित भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान में उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों को लेकर शोध करने वाले विनीत कुमार ने मंगलवार को ट्वीट किया, मुंबई सांताक्रूज चक्रवात के प्रभाव के कारण पिछले 24 घंटों में 230 मिमी बारिश हुई, यह दर्ज इतिहास में मुंबई में मई में 24 घंटे में हुई सबसे अधिक बारिश है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई केंद्र के अनुसार, सांताक्रूज वेधशाला ने मंगलवार सुबह 8.30 बजे समाप्त हुई 24 घंटे की अवधि में 230.3 मिमी बारिश दर्ज की।  इसके अलावा, कोलाबा वेधशाला ने इसी अवधि के दौरान 207.6 मिमी बारिश दर्ज की। आईएमडी की गणना के अनुसार, 204.5 मिमी से अधिक वर्षा को अत्यधिक भारी वर्षा माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि कुल 135 ‘हाई टेंशन वायर’ के खंभे, 418 ‘लोकल ट्रांसमिशन’ के खंभे और आठ ‘ट्रांसफार्मर’ क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य के ऊर्जामंत्री नितिन राऊत ने कहा है कि विद्युत आपूर्ति बहाल करने केलिए 13,172 कर्मचारी युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। रायगढ़ की जिलधिकारी निधि चौधरी ने सभी तहसीलदारों को चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है।



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posted : Sat/May 22, 2021, 09:38 AM - IST

उत्तराखंड में अतीस,... / अल्मोड़ा/ जैव विविधता के लिए मशहूर उत्तराखंड में अतीस, वन ककड़ी, कुटकी, वन हल्दी, थुनेर, मीठा विष, जटामासी समेत कई दुर्लभ वनस्पतियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। अनियंत्रित दोहन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। वैश्वीकरण ने जिस तरह उत्तराखंड की जैव विविधता को नुकसान पहुंचाया है, यदि यह नहीं रुका तो भविष्य में इसके भयानक दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  71 फीसदी वन भूभाग वाला उत्तराखंड जैव विविधता के लिए मशहूर है। यहां अतीस, वन ककड़ी, गंदरैणी, कुटकी, वन हल्दी, थुनेर, मीठा विष, जटामासी समेत कई दुर्लभ किस्म की वनस्पतियां बहुतायत में मौजूद हैं, जिनका किसी न किसी रूप में औषधीय महत्व है। लंबे समय से बड़े पैमाने पर इन वनस्पतियों का अनियंत्रित दोहन हो रहा है। इस कारण इन वनस्पतियों के अस्तित्व पर संकट का साया मंडरा रहा है। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल अल्मोड़ा के जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट के अनुसार वन ककड़ी, गदरैणी, कुटकी, थुनेर, अतीस, मीठा विष, वन हल्दी समेत अन्य कई वनस्पतियों का बड़े पैमाने पर हो रहा अनियंत्रित दोहन यह  चिंताजनक है। इससे जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे बचेगी जैव विविधता पिछले कुछ सालों में इन वनस्पतियों के अनियंत्रित दोहन में बड़ी तेजी आई है। इस कारण उत्तराखंड में यह वनस्पतियां कम होते जा रही हैं। दोहन पर रोक नहीं लगाई तो भविष्य में यह विलुप्ति के कगार पर पहुंच जाएंगी। उन्होंने कहा कि जैव विविधता को पहुंच रहे नुकसान के कारण जंगलों में जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। उन्हें जंगलों में खाने को कुछ नहीं मिल रहा है। इस कारण जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। दुर्लभ वनस्पतियों की ऐसी प्रजातियों को बचाने और संवर्धन करने का काम वन प्रभागों के जरिये हो सकता है। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल अल्मोड़ा के जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट ने कहा कि जैव विविधता को बचाने के लिए स्कूलों में हर्बल गार्डन बनाए जाने चाहिए। साथ ही किसानों को औषधीय उत्पादों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। जंगलों में अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ ही वन संरक्षण में लोगों की सहभागिता बढ़ानी होगी। जंगलों में फलदार पौधे लगाने को प्राथमिकता देनी होगी। जानवरों को जंगलों में ही भोजन मिल जाएगा तो वह आबादी की ओर भी नहीं आएंगे। सबसे अहम बात यह है कि ‘जैव विविधता संरक्षण शिक्षा’ को बढ़ावा देना होगा। इसे स्कूली पाठ्यक्रमों में लागू किया जाना चाहिए ताकि बच्चे भी अपने खास भूगोल के बारे में जान सके।



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posted : Tue/Jun 29, 2021, 06:48 AM - IST

Wardha / पर्यावरण संरक्षण को... / वर्धा/पर्यावरण के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है| यहां हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा करता है | ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण सृजन का उत्तम साधन है | पर्यावरण के संरक्षण के लिए वन विभाग के सहयोग की आवश्यकता है |  कोरोना का हाल में शहरों से लौटे मजदूरों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है, उन्हें पौधारोपण  के काम से जोड़ने की आवश्यकता है | कोरोना काल में शहर से लौटे मजदूरों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है, उन्हें पौधारोपण के काम से जोड़ने की जरूरत है, देश में 2 प्रतिशत भूमि पर ही वन है, यह बहुत कम है, इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए  | वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण करना चाहिए | साथी पेड़ों की कटाई को रोकने की जरूरत है | वन के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती | इसके लिए ग्रीन जोन बनाने की आवश्यकता है | ग्रीन जोन बनाने से पर्यावरण को काफी लाभ होगा |



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posted : Wed/Jul 21, 2021, 01:35 AM - IST

Amravati Division / सोसोखेड़ा गांव... / धारणी/ आज 19 जुलाई 2021 को अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम 2006 नियम 2008 संशोधन नियम 2012 के तहत सोसोखेड़ा गांव को वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1) के तहत सामूहिक वन अधिकार मिला है. सामूहिक वन अधिकार (सीएफआर)। हालांकि, उनके तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण, ऐसा पहले नहीं किया गया है। जून 2020 से, सामाजिक प्रगति सहयोग (एसपीएस) के अनुरूप सामूहिक वन अधिकारों का प्रबंधन करने का निर्णय लिया गया। इसने सूक्ष्म नियोजन योजना तैयार कर इसके क्रियान्वयन की शुरुआत की और प्रथम वर्ष में सीएफआर क्षेत्र में रोजगार गारंटी योजना के तहत 75 हेक्टेयर क्षेत्र में डीसीटी कार्य किया गया। इसमें से 6000 मानव दिवस सृजित किए गए। इसके लाभों को ध्यान में रखते हुए यदि वे क्षेत्र में बांस, कस्टर्ड सेब, गुड़, आंवला के पेड़ लगाते हैं, तो यह अगले चार-पांच वर्षों में फल देना शुरू कर देगा और यह लाभदायक होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा ने कठिन परिश्रम से वृक्षारोपण करने का निर्णय लिया। गांव में 101 परिवार हैं और प्रत्येक परिवार ने 50 गड्ढे खोदकर पेड़ लगाने और उनका पालन-पोषण करने का फैसला किया।5000 गड्ढे खोदे गए। इसलिए आज वृक्षारोपण उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन माननीय डॉ. श्री वैभव वाघमारे सर (सहा. जिल्हाधिकारी तथा उपविभागीय अधिकारी धारणी) यह मुख्य अतिथि थे तथा  मा.श्री अतुल पटोळे (तहसीलदार धारणी), मा. श्री महेश पाटील सर (उच्च श्रेणी) गटविकास अधिकारी पंचायत समिती धारणी, श्री. रामलाल काळे (ग्रामसभा पयविहिर), श्री. धनंजय साय्यारे (निसर्ग फाउंडेशन धारणी) सौ. रुमकाबाई कासदेकर (सरपंच ग्रा.पं जांभु ),श्री. गरिब्या शनवारे (उपसरपंच  ग्रा.पं जांभु), श्री. धर्मेंद्र गेहलोत, (समाज प्रगती सहयोग), श्री. संदीप घुसाळे(प्रकल्प समन्वयक, प्रकल्प कार्यालय धारणी), श्री. जितेंद्र मोहोड (तालुका वन हक्क समन्वयक धारणी) ओर श्री नितीन कांबळे (सोसोखेडा बिट वनरक्षक ) श्री. के. बी. तायडे (वनपाल), श्री. नारायण आठोले, (PTO) तर ओर SPS के दिपेश, विक्की, स्वामी, अमोल व टीम तसेच टाटा ट्रस्ट चे समन्वयक संगीता मॅडम, सुनील सर व सामुहिक वन हक्क समितीचे अध्यक्ष नारायण मावस्कर, उपाध्यक्ष राधा बेठेकर तर सचिव कृष्णा खडके, कुंजीलाला सावलकर, श्री. सोनाजी सावलकर, श्री. मानाजी सवालकर, श्री. संतुलाल बेठेकर, श्री. बिसराम सवालकर, श्री. साभुलाल मावस्कार और अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति के दौरान ली गई तस्वीरें।



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By  PALLAVI...
posted : Thu/Jul 22, 2021, 05:18 AM - IST

देश भर में बने... / दिल्ली / बारिश का मौसम सुरु हो गया है और अभी बारिश ने सभी तरफ हड़तं मजा दी है। सभी तरफ बारिश आ रही है। कहि कहि सड़को पर गाड़िया दुब रही है, तो कहि घर। मॉनसून ट्रफ अब अमृतसर, करनाल, अलीगढ़, सुल्तानपुर, जमशेदपुर से होते हुए उत्तर पश्चिम बंगाल के ऊपर कम दबाव के क्षेत्र और फिर पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रही है। एक अपतटीय ट्रफ रेखा दक्षिण गुजरात तट से कर्नाटक तट तक फैली हुई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के आसपास के हिस्सों पर बना हुआ है। निचले स्तरों में असम के मध्य भाग में भी एक चक्रवाती हवाओं का चित्र देखा जा सकता है।  मुम्बई में भी जोरोसे बारिश हो रही है।  जून के महीने तथा जुलाई के पहले पखवाड़े में जो मानसून की कमी देखी गई थी वह अब पूरी होने वाली है। भारतीय मौसम विभाग ने देशभर के अलग अलग राज्यों में अगले 4 दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा, तटीय आंद्र प्रदेश तथा तटीय आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बररसात की चेतावनी जारी की गई है।   



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